Buddha Manav Vikash Sansthan is dedicated to supporting communities by promoting education & skill development, community health & well-being, environmental conservation & sustainable livelihoods, cultural preservation & heritage, and social empowerment & peacebuilding, all grounded in the principles of compassion (karuṇā), non-violence (ahiṃsā), and mindfulness (sati). We work to uplift underserved populations in Buddhist regions, particularly monastic communities, lay followers, and rural areas.
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Buddha Manav Vikash Trust
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IFSC : UTIB0002436
Pay back to Society
समाज में जीते हुए हर व्यक्ति पर यह नैतिक दायित्व होता है कि वह उस समाज के विकास में अपना योगदान दे, जिसने उसे पहचान, अवसर और जीवन का आधार प्रदान किया है। “समाज को वापस लौटाना” मात्र एक परोपकारी विचार नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने का वह मार्ग है, जिसे मानवता का मूल धर्म माना गया है। यह भावना विशेष रूप से बौद्ध सिद्धांतों में गहराई से निहित है, जहाँ करुणा, दान, मैत्री और सेवा को श्रेष्ठतम गुण कहा गया है।
बौद्ध दर्शन के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति का वास्तविक उत्थान तभी संभव है जब वह आत्मकेन्द्रितता से मुक्त होकर दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करे। बुद्ध ने कहा था— “अप्प दीपो भव” अर्थात अपने भीतर का दीपक जलाएँ और दूसरों के जीवन को रोशन करें। यह संदेश परोपकार की उस भावना को जन्म देता है जो समाज में समानता, करुणा और साझा विकास को बढ़ावा देती है।
दया (Karuna) और मैत्री (Metta) बौद्ध जीवनदर्शन के प्रमुख स्तंभ हैं। करुणा हमें दूसरों के दुख को अपना मानने की प्रेरणा देती है, जबकि मैत्री हर जीव के प्रति प्रेम और सद्भावना को जन्म देती है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर तैयार किया गया कोई भी चैरिटी कार्यक्रम समाज के वास्तविक उत्थान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा कार्यक्रम न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि लोगों में आत्मसम्मान, आशा और सकारात्मक परिवर्तन का भाव भी जगाता है।
बौद्ध सिद्धांतों से प्रेरित परोपकारी कार्यक्रमों में दान (Dāna) की अवधारणा विशेष महत्व रखती है। बौद्ध विचार में दान केवल वस्तुओं का दान नहीं, बल्कि समय, श्रम, ज्ञान और सद्भावना का दान भी equally महत्वपूर्ण माना गया है। जब व्यक्ति बिना किसी लालसा या अहंकार के समाज के वंचित वर्गों की सहायता करता है, तब न केवल जरूरतमंदों का जीवन सुधरता है, बल्कि दाता के भीतर भी शांति और संतोष का भाव विकसित होता है। यही कारण है कि बौद्ध समुदाय ने सदियों से शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन वितरण और आश्रय जैसी सेवाओं को अपने सामाजिक कार्यक्रमों का अभिन्न अंग बनाया है।
Pay back to Society के लिए किसी बड़े कार्य या विशाल संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। उदाहरण के लिए—गरीब बच्चों की शिक्षा में सहायता, वृद्धों की सेवा, अनाथालयों में सहयोग, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास, या किसी बीमार व्यक्ति के उपचार में मदद—यह सब बौद्ध करुणा और निःस्वार्थ सेवा का ही रूप है। जब यह प्रयास सामूहिक रूप से किए जाते हैं, तब समाज अधिक समतामूलक, संवेदनशील और उन्नत बनता है।
बौद्ध सिद्धांत यह भी बताते हैं कि वास्तविक विकास केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन से भी होता है। इसलिए चैरिटी कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, ध्यान (Meditation) शिविर, नशा मुक्ति, और भावनात्मक सहयोग को भी शामिल करना चाहिए। इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता और संयम का भाव बढ़ता है, जो आगे चलकर उसे भी समाज के लिए उपयोगी बनाता है।
अंततः, “Pay back to Society” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने का बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक मार्ग है। यह हमें सिखाता है कि हम जो कुछ भी हैं, वह समाज की देन है, और हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी क्षमता और संसाधनों से दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाएँ। बौद्ध करुणा और मैत्री पर आधारित परोपकार न केवल जरूरतमंदों का सहारा बनता है, बल्कि सम्पूर्ण समाज को अधिक शांत, संवेदनशील और समृद्ध बनाता है। इस प्रकार, बौद्ध सिद्धांतों से प्रेरित चैरिटी कार्यक्रम न केवल सेवा का माध्यम हैं, बल्कि “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के पथ पर चलने का सर्वोच्च साधन भी हैं।
“समाज को वापस देना” यह याद दिलाता है कि हमारी सफलता सिर्फ हमारी नहीं होती, बल्कि पूरे समाज के सहयोग और समर्थन से ही बनती है। बुद्धा मानव विकास ट्रस्ट इस भावना को जीवन में उतारने का एक प्रेरणादायक माध्यम है। हमें भी अपनी क्षमता के अनुसार समय, ज्ञान, दया या संसाधनों के रूप में समाज को लौटाना चाहिए, ताकि हम एक उज्ज्वल, सभ्य और मानवीय समाज का निर्माण कर सकें।
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